नए जिलों के लिए भजनलाल सरकार ने बनाई कमेटी, अशोक गहलोत ने उठा दिए मंशा पर सवाल

Rajasthan News: राजस्थान की पिछली अशोक गहलोत सरकार में बने 17 नए जिलों की समीक्षा की जाएगी. राजस्थान की वर्तमान भजनलाल शर्मा सरकार ने इसको लेकर कैबिनेट सब-कमेटी बनाई है. वहीं इस रिव्यू के बाद कई छोटे जिलों पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं.

Jun 13, 2024 - 21:57
Jun 14, 2024 - 12:31
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नए जिलों के लिए भजनलाल सरकार ने बनाई कमेटी, अशोक गहलोत ने उठा दिए मंशा पर सवाल

जयपुर

गहलोत सरकार के दौरान बनाए गए 17 नए जिलों को लेकर अब भजनलाल सरकार रिव्यू करवा रही है। भजनलाल सरकार का मानना है कि कांग्रेस ने चुनाव में सियासी फायदे को ध्यान में रखते हुए नए जिलों का गठन कर दिया जो कागजों में ही संचालित हो रहे हैं। जिनका न तो कोई स्ट्रक्चर है, ना कोई भौगोलिक स्थिति। ऐसे में भजन लाल सरकार ने अब जिलों का रिव्यू करवाने का निर्णय किया है। राज्य सरकार के इस निर्णय से सियासी हलचल तेज हो गई है। वहीं अपने निर्णय के खिलाफ रिव्यू होते देख कांग्रेस पलटवार करने लगी है। इस बीच सवाल उठ रहा है कि भजनलाल सरकार की ओर से रिव्यू करने का निर्णय बीजेपी के लिए कितना फायदेमंद और कितना नुकसानदायक होगा? सियासत में इस निर्णय को लेकर क्या समीकरण देखने को मिलेगी। इस रिपोर्ट के जरिए समझने की कोशिश करते हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भजनलाल सरकार के फैसले पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (ASHOK GEHLOT) ने अपने सोशल मीडिया के जरीए बयान जारी करते हुए कहा है कि हमारी सरकार ने राजस्थान में नए जिले रिटायर्ड IAS श्री रामलुभाया की समिति की रिपोर्ट के आधार पर बनाए। राजस्थान में नए जिलों की सख्त आवश्यकता थी। क्षेत्रफल में राजस्थान से छोटे मध्य प्रदेश में 55 जिले हैं। छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य में भी 33 जिले हैं। हमारी सरकार ने प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने एवं सर्विस डिलीवरी को बेहतर करने के लिए नए जिले बनाए और वहां कलेक्टर, एसपी एवं अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों को तैनात किया। राजस्थान की भाजपा सरकार ने मंत्रिमंडलीय उप-समिति बनाकर जिलों का रिव्यू करने का फैसला किया है। अब यह देखना होगा कि यह समिति राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियों एवं विकास के हित को देखकर फैसला लेगी या फिर राजनीतिक कारणों से पिछली सरकार के फैसले को गलत साबित करने की मंशा से कार्य करते हुए राजस्थान की जनता के हितों को ताक पर रखेगी।



नए जिलों का क्या करेगी सरकार?

कमेटी में डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा को इस कमेटी का संयोजक बनाया गया है, जबकि कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़, कन्हैयालाल चौधरी, हेमंत मीणा और सुरेश रावत को कमेटी का सदस्य बनाया गया है। यह कमेटी 17 जिलों और 3 संभागों के प्रशासनिक दृष्टिकोण से क्षेत्राधिकार, सुचारू संचालन, प्रशासनिक आवश्यकता और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के वर्तमान परिपेक्ष्य में समीक्षा करके मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।

बीजेपी को होगा फायदा या नुकसान?

गहलोत सरकार की ओर से पिछले साल बनाए गए 17 नए जिलों को लेकर राज्य सरकार ने आपत्ति जताई है। इसको लेकर अब कमेटी नए जिलों को लेकर समीक्षा करेगी। इधर, सियासी सवाल खड़ा हो गया है कि नए जिलों की समीक्षा से बीजेपी सरकार को फायदा होगा या नुकसान? इसको लेकर राजनीतिक जानकार अपने-अपने मायने निकाल रहे हैं, लेकिन एक बात तो है, अगर रिव्यू कमेटी की बैठक में कुछ जिलों को हटाने की सिफारिश की जाती है तो प्रदेश में सियासी विवाद जरूर खड़ा हो सकता है। कांग्रेस इस फैसले को लेकर जमकर बवाल कर सकती है।

पंचायत राज चुनाव को ध्यान में रखकर क्या कर सकती है सरकार?

भजनलाल सरकार ने लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद 17 नए जिलों के रिव्यू करने का निर्णय लिया, लेकिन प्रदेश में नवंबर दिसंबर में एक बार फिर चुनाव की आहट है। प्रदेश में पंचायत राज चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में नए जिलों के रिव्यू की रिपोर्ट आने के बाद सरकार इससे होने वाले सियासी नुकसान से बचने के लिए एक प्रयास यह भी कर सकती है। भले ही सरकार रिव्यू कमेटी की रिपोर्ट की सिफारिश को अभी नहीं मानें, ताकि प्रदेश में पंचायत राज चुनाव निपट जाए और बीजेपी को सियासी नुकसान भी ना हो, ऐसे में कयास हैं कि कमेटी की सिफारिश को राज्य सरकार पंचायत राज के चुनाव के बाद लागू करेगी।

करीब तीन जिलों पर सरकार की है आपत्ति

गहलोत सरकार ने पिछले बजट सत्र में 17 नए जिलों की घोषणा की। इसमें तीन ऐसे जिले हैं, जिनको लेकर काफी विवाद भी हुआ। बीजेपी ने चुनाव से पहले वादा किया था कि यदि उनकी सरकार बनी तो नए जिलों को लेकर रिव्यू किया जाएगा। ऐसे में कयास है कि राजस्थान में तीन नए जिले में दूदू, केकड़ी और शाहपुरा पर सरकार की आपत्ति है। इनमें दूदू तो सबसे छोटा जिला है, जिसका ग्राम पंचायत से सीधे जिला बनाए जाना राजस्थान में काफी सुर्खियों में रहा। ऐसे में माना जा रहा है कि रिव्यू कमेटी की रिपोर्ट के बाद इन जिलों पर गाज गिर सकती है। बता दें कि दूदू को जिला बनवाने के लिए तत्कालीन विधायक बाबूलाल नागर ने मुख्यमंत्री गहलोत से मिलकर यह कार्य सम्भव किया लेकिन नागर को जिला बनवाने के बाद भी हार का सामना करना पड़ा। इसी तरह कांग्रेसी नेता रघु शर्मा ने प्रयास करके केकड़ी को जिला बनवाया, लेकिन उन्हें भी इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इसी तरह शाहपुरा में भी कैलाश मेघवाल को जिला बनाने के बाद भी हार मिली।

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