Ground Report भजनलाल सरकार तोड़ना चाहती है अशोक गहलोत का सपना
जयपुर के मानसरोवर मे स्थित महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली राशी के पिता का देहांत हो चुका है। वो अपनी मां के लिए कुछ करना चाहती है। राशी का सपना इंग्लिश की टीचर बनने का है। लेकिन अब उसके सपने पर खतरा मंडराने लगा है।
जयपुर।
राजस्थान में चल रहे 2000 से ज्यादा महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों को हिंदी मीडियम में बदलने की तैयारी चल रही है। शिक्षा विभाग ने जिला स्तर पर अधिकारियों से इंग्लिश मीडियम स्कूल के मौजूदा हालात, टीचर्स की संख्या, स्टूडेंट की संख्या के साथ ही उसे फिर से हिंदी मीडियम में शुरू करने की सिफारिश मांगी है। इसके आधार पर फैसला कर शिक्षा विभाग इंग्लिश मीडियम स्कूल को फिर से हिंदी मीडियम में बदलेगा।
शिक्षामंत्री दे चुके है बयान
बता दें कि भजन लाल सरकार बनने के बाद शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बड़ा बयान देकर कहा था कि गहलोत सरकार के दौरान महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोले गए। इनको वापस हिंदी माध्यम में कन्वर्ट किया जाएगा। इसको लेकर अब यह प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए शिक्षा मंत्री के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने राजस्थान के अंग्रेजी विद्यालयों को वापस हिंदी में कन्वर्ट करने के लिए चार पेज का फॉर्मेट जारी कर दिया है।
अशोक गहलोत का सपना था ये प्रोजेक्ट
अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की शुरूआत गहलोत सरकार ने 2019 में की थी। शुरूआत में जिला मुख्यालयों पर पायलट प्रोजेक्ट टके तौर पर शुरू किया गया था। बाद में ब्लॉक व पंचायत स्तर पर भी शुरू कर दिया गया। वर्तमान में प्रदेश में करीब 3300 स्कूल संचालित है।पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधानसभा में एक बार बोलते हुए कहा था कि राजस्थान एक ऐसा राज्य बनेगा जिसके गांवो- गांवो में भी बच्चे अंग्रेजी बोलेंगे।
बच्चों और अभिभावकों की राय
मैं पहले हिंदी स्कूल में थी लेकिन फिर जब इस इंग्लिश मीडियम स्कूल के बारे में पता चला तो यहां दाखिला ले लिया। रिश्तेदारों को जब बताती हूं कि इंग्लिश स्कूल में पढ़ रही हूं तो वो भी कहते है चलो अच्छा है कुछ सिखेगी। इन स्कूलों को दुबारा से हिंदी मीडियम नहीं बनाना चालिए। इससे बच्चों का बहुत नुकसान होगा। - राशी शर्मा, स्टूडेंट
ये इंग्लिश स्कूल बहुत अच्छे हैं। भविष्य के लिए अंग्रेजी बहुत जरूरी है। जो गरीब बच्चे इंग्लिश स्कूलों में नहीं पढ़ पाते उनके लिए ये बहुत अच्छे विकल्प है। ऐसे स्कूल और भी खोले जाने चाहिए। साथ ही सुविधाओं में भी इज़ाफा किया जा चाहिए जिससे और बच्चे भी आ सके। -मोमिता नवल, स्टूडेंट
आज कल पढ़ाई बहुत जरूरी है। सब परफैक्ट व्यक्तियों को ही महत्व देते है। गरीब बच्चों के लिए घर का खर्चा निकालना ही मुश्किल होता है।ऐसे में सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूल बहुत जरूरी है। ये और खोले जाने चाहिए। कच्ची बस्ती में रहने वालों के लिए आस-पास ही स्कूल खोले जाने चाहिए। जिससे वो भी पढ़ सकें। ये स्कूल बंद नहीं होने चाहिए। -प्रियंका गुर्जर, स्टूडेंट
मेरे पति का देहांत हो गया था। हमारी आर्थिक स्थिती अच्छी नहीं थी। इसके पिता पंडिताई का काम करते थे। इसलिए हमारे पास पैसे भी नहीं बचे थे कि अपने बच्चों को किसी प्राइवेट स्कूल में पढ़ा सकूं। फिर अपनी बच्ची को मैंने इस सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूल में भर्ती करवाया। आज मैं खुश हूं कि हम गरीबों के बच्चे भी अब इंग्लिश स्कूल में पढ पा रहे है। - अभिभावक
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